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1. नींद थी और रात थी (Nind thi aur raat thi) / by सिंह, सविता (Singh, Savita) Publication: Delhi : Radhakrishna Prakashan, 2019 . 142 p. ; 23 cm. Date: 2019 Availability: Items available: Azim Premji University, Bangalore General Stacks [891.431 SIN] (1),
2. अपने जैसा जीवन (Apne jaisa jeevan) / by सिंह, सविता (Singh, Savita) Publication: Delhi : Radhakrishan Prakashan, 2013 . 104 p. ; 22 cm. Date: 2013 Availability: Items available: Azim Premji University, Bangalore General Stacks [891.431 SIN] (1),
3. दूब धान (Doob dhaan) / by अनामिका (Anamika). Publication: New Delhi : Bharatiya Jnanpith, 2020 . 184 p. ; 22 cm. Date: 2020 Availability: Items available: Azim Premji University, Bangalore General Stacks [891.431 ANA] (1),
4. दुष्चक्र में स्रष्टा (Dushchakra mein srasta) / by डंगवाल, वीरेन (Dangwal, Viren) Publication: New Delhi ; Rajkamal Prakashan, 2015 . 116 p. ; , साहित्य अकादेमी द्वारा सम्मानित कृति। 22 cm. Date: 2015 Availability: Items available: Azim Premji University, Bangalore General Stacks [891.431 DAN] (1),
5. अम्बर में अबाबील (Ambar mein Ababeel) / by प्रकाश, उदय (Prakash, Uday) Publication: New Delhi : Vani Prakashan, 2019 . 152 p. ; 21 cm. Date: 2019 Availability: Items available: Azim Premji University, Bangalore General Stacks [891.431 PRA] (1),
6. नये युग में शत्रु (Naye yug mein shatru) / by डबराल, मंगलेश (Dabral, Mangalesh) Publication: Delhi, Radhakrishna Prakashan : 2013 . 116 p. ; , एक बेगाने और असंतुलित दौर में मंगलेश डबराल अपनी नयी कविताओं के साथ प्रस्तुत हैं-अपने शत्रु को साथ लिये। बारह साल के अंतराल से आये इस संग्रह का शीर्षक चार ही लफ़्जों में सब कुछ बता देता है : उनकी कला-दृष्टि, उनका राजनीतिक पता-ठिकाना, उनके अंतःकरण का आयतन। यह इस समय हिंदी की सर्वाधिक समकालीन और विश्वसनीय कविता है। भारतीय समाज में पिछले दो-ढाई दशक के फासिस्ट उभार, सांप्रदायिक राजनीति और पूंजी के नृशंस आक्रमण से जर्जर हो चुके लोकतंत्र के अहवाल यहां मौजूद हैं और इसके बरक्स एक सौंदर्य-चेतस् कलाकार की उधेड़बुन का पारदर्शी आकलन भी। ये इक्कीसवीं सदी से आंख मिलाती हुई वे कविताएं हैं जिन्होंने बीसवीं सदी को देखा है। ये नये में मुखरित नये को भी परखती हैं और उसमें जानती हैं। हिंदी कविता में वर्तमान सदी की शुरुआत ही गुजरात के मृतक का बयान' से होती है। ऊपर से शांत, संयमित और कोमल दिखनेवाली लगभग आधी सदी से पकती हुई मंगलेश की कविता हमेशा सख़्तजान रही है-किसी भी चीज़ के लिए तैयार! इतिहास ने जो ज़ख्म दिये हैं उन्हें दर्ज करने, मानवीय यातना को सोखने और प्रतिरोध में ही उम्मीद का कारनामा लिखने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध। यह हाहाकार की जबान में नहीं लिखी गयी है; वाष्पीभूत और जल्दी ही बदरंग हो जानेवाली भावुकता से बचती है। इसकी मार्मिकता स्फटिक जैसी कठोरता लिये हुए है। इस मामले में मंगलेश 'क्लासिसिस्ट' मिज़ाज के कवि हैं सबसे ज़्यादा तैयार, मंजी हुई, और तहदार ज़बान लिखनेवाले। मंगलेश असाधारण संतुलन के कवि हैं-उनकी कविता ने न यथार्थ-बोध को खोया है, न अपने निजी संगीत को। वे अपने समय में कविता की ऐतिहासिक ज़िम्मेदारियों को अच्छे से संभाले हुए हैं और इस कार्यभार से दबे नहीं हैं। मंगलेश के लहजे की नर्म-रवी और आहिस्तगी शुरू से उनके अकीदे की पुख़्तगी और आत्मविश्वास की निशानी रही है। हमेशा की तरह जानी-पहचानी मंगलेशियत इसमें नुमायां है। और इससे ज़्यादा आश्वस्ति क्या हो सकती है कि इन कविताओं में वह साजे-हस्ती बे-सदा नहीं हुआ है जो "पहाड़ पर लालटेन' से लेकर उनके पिछले संग्रह 'आवाज भी एक जगह है' मैं सुनाई देता रहा था! 'नये युग में शत्रु' में उसकी सदा पूरी आबो-ताब से मौजूद है। 23 cm. Date: 2013 Availability: Items available: Azim Premji University, Bangalore General Stacks [891.431 DAB] (1),
7. आवाज़ भी एक जगह है (Aawaz bhi ek jagah hai) / by डबराल, मंगलेश (Dabral, Mangalesh) Publication: Delhi : Vani Prakashan, 2004 . 91 p. ; 22 cm. Date: 2004 Availability: Items available: Azim Premji University, Bangalore General Stacks [891.431 DAB] (1),
8. घर का रास्ता (Ghar ka rasta) / by डबराल, मंगलेश (Dabral, Mangalesh) Publication: Delhi : Radhakrishan Prakashan, 2017 . 80 p. ; 23 cm. Date: 2017 Availability: Items available: Azim Premji University, Bangalore General Stacks [891.431 DAB] (1),
9. पहाड़ पर लालटेन (Pahar per laltain) / by डबराल, मंगलेश (Dabral, Mangalesh) Publication: Delhi : Radhakrishan Prakashan, 2014 . 72 p. ; 22 cm. Date: 2014 Availability: Items available: Azim Premji University, Bangalore General Stacks [891.431 DAB] (1),
10. मगध (Magadh) / by वर्मा (Verma), श्रीकान्त (Shrikant). Publication: New Delhi : Rajkamal Prakashan, 2019 . 111 p. ; 22 cm. Date: 2019 Availability: Items available: Azim Premji University, Bangalore General Stacks [891.431 VER] (1),
11. अपनी केवल धार (Apni keval dhar) / by कमल (Kamal), अरुण (Arun). Publication: New Delhi : Vani Prakashan, 2012 . 80 p. ; , भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित कृति कविता संग्रह। 23 cm. Date: 2012 Availability: Items available: Azim Premji University, Bangalore General Stacks [891.431 KAM] (1),
12. पुतली में संसार (Putali mein sansar) / by कमल (Kamal), अरुण (Arun). Publication: New Delhi : Vani Prakashan, 2013 . 104 p. ; , कविताएँ 1996-2002. 22 cm. Date: 2013 Availability: Items available: Azim Premji University, Bangalore General Stacks [891.431 KAM] (1),
13. अनुष्टुप (Anushtup) / by अनामिका (Anamika). Publication: New Delhi : Vani Prakashan, 2019 . 152 p. ; 23 cm. Date: 2019 Availability: Items available: Azim Premji University, Bangalore General Stacks [891.431 ANA] (1),

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