Normal view MARC view ISBD view

दुष्चक्र में स्रष्टा (Dushchakra mein srasta) /

by डंगवाल, वीरेन (Dangwal, Viren)
Edition statement:1st ed. Published by : Rajkamal Prakashan, (New Delhi ;) Physical details: 116 p. ; 22 cm. ISBN:9788126704132 (hbk.). Year: 2015
Tags from this library: No tags from this library for this title. Log in to add tags.

साहित्य अकादेमी द्वारा सम्मानित कृति।

हमारी नींद -- हड्डी खोपड़ी ख़तरा निशान -- हमारा समाज -- रेल का विकट खेल -- बसन्त-दर्शन -- मार्च की एक शाम में -- आईआईटी कानपुर -- सूखा -- मानसून का पहला पानी -- मोटरसाइकिल पर सैनिक -- दुश्चक्र में स्रष्टा -- उजले दिन ज़रूर -- शमशेर 28 बाँदा -- फ़ैज़ाबाद-अयोध्या -- सितारों के बारे में -- जहाँ की महिलाएँ हों गयीं कहीं -- चूना -- रात की रानी -- तारन्ता बाबू से कुछ सवाल -- पोस्टकार्ड महिमा -- नींदें -- ज़हीरुद्दीन डागर का ध्रुपद सुनकर -- पुरानी उम्र -- जहाँ मैं हूँ -- अपना घर

वीरेन डंगवाल का यह कविता संग्रह -जैसे अपने विलक्षण नाम के साथ हमें उस दुनिया में ले जाता है जो इन वर्षों में और भी जटिल, और भी कठिन हो चुकी है और जिसके अर्थ और भी बेचैन करनेवाले बने हैं। विडम्बना, व्यंग्य, प्रहसन और एक मानवीय एब्सर्डिटी का अहसास वीरेन की कविता के जाने- पहचाने कारगर तत्त्व रहे हैं और एक गहरी राजनीतिक प्रतिबद्धता से जुड़कर वे हाशियों पर रह रही मनुष्यता की आवाज़ बन जाते हैं। इन कविताओं में इन काव्य-युक्तियों का ऐसा विस्तार है जो घर और बाहर, निजी और सार्वजनिक, आन्तरिक और बाह्य को एक साथ समेटता हुआ ज्यादा बुनियादी काव्यार्थों को सम्भव करता है। विचित्र, अटपटी, अशक्त, दबी- कुचली और कुजात कही जानेवाली चीजें यहाँ परस्पर संयोजित होकर शक्ति, सत्ता और कुलीनता से एक अनायास बहस छेड़े रहती हैं और हम पाते हैं कि छोटी चीजों में कितना बड़ा संघर्ष और कितना बड़ा सौन्दर्य छिपा हुआ है।

There are no comments for this item.

Log in to your account to post a comment.

Teachers Portal | ERP Portal |Sitemap | Credits | Facebook | Youtube© 2017 Azim Premji Foundation | DISCLAIMER